हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.24.15

मंडल 8 → सूक्त 24 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 24
न॒ह्य१॒॑ङ्ग पु॒रा च॒न ज॒ज्ञे वी॒रत॑र॒स्त्वत् । नकी॑ रा॒या नैवथा॒ न भ॒न्दना॑ ॥ (१५)
हे इंद्र! प्राचीनकाल में तुमसे अधिक वीर, धनसंपन्न, शत्रुओं पर आक्रमण करने वाला एवं स्तुति योग्य कोई नहीं हुआ. (१५)
O Indra! In ancient times, there has been no one more brave, rich, attacking enemies and praiseworthy than you. (15)