हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.26.22

मंडल 8 → सूक्त 26 → श्लोक 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 26
त्वष्टु॒र्जामा॑तरं व॒यमीशा॑नं रा॒य ई॑महे । सु॒ताव॑न्तो वा॒युं द्यु॒म्ना जना॑सः ॥ (२२)
विचित्र कर्म करने वाले वायु! हम तुम्हारे पालन के प्रति सोमरस निचोड़कर धन मांगते हैं. वायु द्वारा दिए धन से हम धनी होंगे. (२२)
The air that does strange things! We ask for money by squeezing somers towards your observance. We will be rich with the money given by air. (22)