ऋग्वेद (मंडल 8)
इ॒दा हि व॒ उप॑स्तुतिमि॒दा वा॒मस्य॑ भ॒क्तये॑ । उप॑ वो विश्ववेदसो नम॒स्युराँ असृ॒क्ष्यन्या॑मिव ॥ (११)
हे सर्वधनसंपन्न देवो! मैं अन्न पाने की अभिलाषा से इसी समय तुम्हारा उत्तम धन पाने के लिए ऐसी स्तुति करता हूं, जिसे किसी ने पहले नहीं सुना. (११)
O god of all! I, with the desire to get food, at this time, praise you for getting the best wealth, which no one has heard before. (11)