हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.27.14

मंडल 8 → सूक्त 27 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 27
दे॒वासो॒ हि ष्मा॒ मन॑वे॒ सम॑न्यवो॒ विश्वे॑ सा॒कं सरा॑तयः । ते नो॑ अ॒द्य ते अ॑प॒रं तु॒चे तु नो॒ भव॑न्तु वरिवो॒विदः॑ ॥ (१४)
समान क्रोध वाले विश्वेदेव मनु को धन आदि देने के लिए एक साथ ही तत्पर हों. वे आज एवं अन्य दिनों में मेरे तथा मेरे पुत्र के लिए धन देने वाले हों. (१४)
Be ready together to give money etc. to Vishvedev Manu with equal anger. Let them give money for me and my son today and on other days. (14)