ऋग्वेद (मंडल 8)
व॒यं तद्वः॑ सम्राज॒ आ वृ॑णीमहे पु॒त्रो न ब॑हु॒पाय्य॑म् । अ॒श्याम॒ तदा॑दित्या॒ जुह्व॑तो ह॒विर्येन॒ वस्यो॒ऽनशा॑महै ॥ (२२)
हे भली प्रकार सुशोभित देवो! तुम्हारे पुत्र-तुल्य हम बहुतों के भोगयोग्य उसी धन की याचना करते हैं. हे आदित्यो! हम उस धन को प्राप्त करें एवं यज्ञ करते हुए उस धन के द्वारा अधिक संपन्नता प्राप्त करें. (२२)
O god well- decorated! Like your sons, we ask for the same wealth that many enjoy. O Adityao! We should get that money and get more prosperity through that money while performing yajna. (22)