ऋग्वेद (मंडल 8)
वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा स्मद्रा॑तिषाचो अ॒ग्नयः॑ । पत्नी॑वन्तो॒ वष॑ट्कृताः ॥ (२)
मैंने वरुण, मित्र एवं यजमान को धन देने वाले अग्नियों को वषट् के द्वारा पत्नीसहित बुलाया है. (२)
I have called Varun, the friends and the host along with the wives through the year. (2)