ऋग्वेद (मंडल 8)
वज्र॒मेको॑ बिभर्ति॒ हस्त॒ आहि॑तं॒ तेन॑ वृ॒त्राणि॑ जिघ्नते ॥ (४)
अकेले इंद्र हाथ में पकड़ा हुआ वज्र धारण करते हैं और उससे शत्रुओं का नाश करते हैं. (४)
Indra alone holds the vajra held in his hand and destroys the enemies with it. (4)
मंडल 8 → सूक्त 29 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation