हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.30.3

मंडल 8 → सूक्त 30 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 30
ते न॑स्त्राध्वं॒ ते॑ऽवत॒ त उ॑ नो॒ अधि॑ वोचत । मा नः॑ प॒थः पित्र्या॑न्मान॒वादधि॑ दू॒रं नै॑ष्ट परा॒वतः॑ ॥ (३)
हे देवो! हमें राक्षसों से बचाओ, हमारी रक्षा करो एवं हमसे अच्छी तरह बोलो. हमारे पिता मनु के दूरागत मार्ग से हमें भ्रष्ट मत करना. (३)
Oh, God! Save us from demons, protect us and speak well to us. Don't corrupt us by the far-right path of our father Manu. (3)