हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.32.1

मंडल 8 → सूक्त 32 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
प्र कृ॒तान्यृ॑जी॒षिणः॒ कण्वा॒ इन्द्र॑स्य॒ गाथ॑या । मदे॒ सोम॑स्य वोचत ॥ (१)
हे कण्वगोत्रीय ऋषियो! जब इंद्र अपनी कहानी सुनकर प्रसन्न हो जावें, तब तुम ऋजीष वाले सोम का वर्णन करो. (१)
O kanvagotrian sages! When Indra is pleased to hear his story, then you describe the sage-wali som. (1)