हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.32.13

मंडल 8 → सूक्त 32 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
यो रा॒यो॒३॒॑ऽवनि॑र्म॒हान्सु॑पा॒रः सु॑न्व॒तः सखा॑ । तमिन्द्र॑म॒भि गा॑यत ॥ (१३)
जो इंद्र, धन के पालक, महान्‌, शोभनव्रत, समाप्ति वाले एवं सोमरस निचोड़ने वाले के मित्र हैं, उन्हीं इंद्र की स्तुति करो. (१३)
Praise indra who is the friend of indra, the great, the great, the adornant, the ender and the one who squeezes the somras, the same indra. (13)