हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.32.26

मंडल 8 → सूक्त 32 → श्लोक 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
अह॑न्वृ॒त्रमृची॑षम और्णवा॒भम॑ही॒शुव॑म् । हि॒मेना॑विध्य॒दर्बु॑दम् ॥ (२६)
दीप्तिशाली इंद्र ने वृत्र, और्णनाभ एवं अहीशुव को मारा एवं तुषार जल से बादल का भेदन किया. (२६)
The bright indra struck Vrithra, Arnabha and Ahishuv and pierced the cloud with the ushy waters. (26)