हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.38.10

मंडल 8 → सूक्त 38 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 38
आहं सर॑स्वतीवतोरिन्द्रा॒ग्न्योरवो॑ वृणे । याभ्यां॑ गाय॒त्रमृ॒च्यते॑ ॥ (१०)
मैं उन्हीं स्तुतिशाली इंद्र व अग्नि से अपनी रक्षा की प्रार्थना करता हूं, जिनके लिए गायत्री छंद वाले साममंत्र बोले जाते हैं. (१०)
I pray for my protection from the same praiseworthy Indra and Agni, for whom the sammantras with Gayatri verses are spoken. (10)