ऋग्वेद (मंडल 8)
न्य॑ग्ने॒ नव्य॑सा॒ वच॑स्त॒नूषु॒ शंस॑मेषाम् । न्यरा॑ती॒ ररा॑व्णां॒ विश्वा॑ अ॒र्यो अरा॑तीरि॒तो यु॑च्छन्त्वा॒मुरो॒ नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥ (२)
हे अग्नि! हमारे शरीरों पर जो शत्रुओं की भविष्य में हिंसा होने वाली है, उसे समाप्त करो. तुम हव्य देने वालों के शत्रुओं को जलाओ. आक्रमण करने वाले सभी बुद्धिहीन शन्रु यहां से चले जावें. अग्नि सभी शत्रुओं की हिंसा करें. (२)
O agni! Put an end to the future violence of our enemies on our bodies. You burn the enemies of those who give the word. Let all the invaders go away from here. Let the agni do the violence of all enemies. (2)