हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.43.11

मंडल 8 → सूक्त 43 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
उ॒क्षान्ना॑य व॒शान्ना॑य॒ सोम॑पृष्ठाय वे॒धसे॑ । स्तोमै॑र्विधेमा॒ग्नये॑ ॥ (११)
खाने योग्य हवि वाले, अभिलाषा करने योग्य अन्न वाले, सोम एवं घृत से युक्त पीठ वाले एवं अभिलाषाओं के विधाता अग्नि की सेवा हम स्तुतियों द्वारा करते हैं. (११)
We serve the agni with praises, those with edible havi, those with a desireable food, those with a back of soma and a shroud, and the vidhata agni of desires. (11)