हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.43.14

मंडल 8 → सूक्त 43 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
त्वं ह्य॑ग्ने अ॒ग्निना॒ विप्रो॒ विप्रे॑ण॒ सन्स॒ता । सखा॒ सख्या॑ समि॒ध्यसे॑ ॥ (१४)
हे विद्वान्‌, साधु एवं सखा अग्नि! तुम विद्वान्‌, साधु एवं सखा अग्नियों की सहायता से जलते हो. (१४)
O scholar, monk and sakha agni! You burn with the help of scholars, sadhus and sakha agnis. (14)