ऋग्वेद (मंडल 8)
अग्ने॒ भ्रातः॒ सह॑स्कृत॒ रोहि॑दश्व॒ शुचि॑व्रत । इ॒मं स्तोमं॑ जुषस्व मे ॥ (१६)
हे यजमानों के भ्राता, शक्ति के द्वारा उत्पन्न रोहित नामक अश्व के स्वामी एवं शुद्धकर्म वाले अग्नि! तुम मेरे इस स्तोत्र को स्वीकार करो. (१६)
O brother of hosts, lord of the horse named Rohita created by power and the agni of pure deeds! You accept this hymn of mine. (16)