हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.43.3

मंडल 8 → सूक्त 43 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
आ॒रो॒का इ॑व॒ घेदह॑ ति॒ग्मा अ॑ग्ने॒ तव॒ त्विषः॑ । द॒द्भिर्वना॑नि बप्सति ॥ (३)
हे अग्नि! तुम्हारी तीखी किरणें आरोचमान पशुओं के समान दांतों से वनों को खाती हैं. (३)
O agni! Your sharp rays eat forests with teeth like that of animals. (3)