हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.45.11

मंडल 8 → सूक्त 45 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
शनै॑श्चि॒द्यन्तो॑ अद्रि॒वोऽश्वा॑वन्तः शत॒ग्विनः॑ । वि॒वक्ष॑णा अने॒हसः॑ ॥ (११)
हे वज्रधारी इंद्र! तुम धीरे-धीरे जाते हुए इन घोड़ों वाले, अधिक धनसंपन्न, चतुर एवं उपद्रवरहित हो. (११)
O thunderbolt Indra! You are slowly going with these horses, more wealthy, smarter and hassle-free. (11)