हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.45.27

मंडल 8 → सूक्त 45 → श्लोक 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
स॒त्यं तत्तु॒र्वशे॒ यदौ॒ विदा॑नो अह्नवा॒य्यम् । व्या॑नट् तु॒र्वणे॒ शमि॑ ॥ (२७)
हे इंद्र! तुमने तुर्वश और यदु नामक राजाओं के प्रसिद्ध यज्ञकर्म को सच्चा जानकर उनकी प्रसन्नता के लिए उनके शत्रु अह्लवास्य को संग्राम में घेरा था. (२७)
O Indra! You had surrounded their enemy Ahlvasya in the battle for their pleasure by knowing the famous yajnakarma of the kings named Turvash and Yadu to be true. (27)