हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.45.37

मंडल 8 → सूक्त 45 → श्लोक 37 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
को नु म॑र्या॒ अमि॑थितः॒ सखा॒ सखा॑यमब्रवीत् । ज॒हा को अ॒स्मदी॑षते ॥ (३७)
हे मनुष्यो! इंद्र के अतिरिक्त कौन क्रोधरहित मित्र है जो अपने मित्र से कहे कि मैंने किसे मारा है एवं मुझसे कौन भागता है? (३७)
O men! Who besides Indra is an angry friend who will say to his friend, "Whom have I killed and who runs away from me?" (37)