हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.45.40

मंडल 8 → सूक्त 45 → श्लोक 40 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
भि॒न्धि विश्वा॒ अप॒ द्विषः॒ परि॒ बाधो॑ ज॒ही मृधः॑ । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥ (४०)
हे इंद्र! तुम सभी शत्रुसेनाओं का भेदन करो, शत्रुओं की हिंसा करो, युद्ध को बंद करो एवं हमें अभिलषणीय धन दो. (४०)
O Indra! You all penetrate the enemy forces, do violence to the enemies, stop the war and give us valuable money. (40)