हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.45.6

मंडल 8 → सूक्त 45 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
उ॒त त्वं म॑घवञ्छृणु॒ यस्ते॒ वष्टि॑ व॒वक्षि॒ तत् । यद्वी॒ळया॑सि वी॒ळु तत् ॥ (६)
हे धन वाले इंद्र! तुम हमारी स्तुति सुनो. तुम्हारा स्तोता जो चाहता है, उसे तुम वही देते हो. तुम जिसे दृढ़ करते हो, वह अवश्य दृढ़ हो जाता है. (६)
O Indra with wealth! You listen to our praise. You give what your stota wants. The one you fortify must become firm. (6)