हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.46.15

मंडल 8 → सूक्त 46 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
द॒दी रेक्ण॑स्त॒न्वे॑ द॒दिर्वसु॑ द॒दिर्वाजे॑षु पुरुहूत वा॒जिन॑म् । नू॒नमथ॑ ॥ (१५)
हे बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! तुम इसी समय मेरे शरीर को बल देने वाले बनो. तुम युद्धों में अन्नयुक्त धन दो तथा हमारे पुत्र आदि को धन दो. (१५)
O Indra called by many! Be the one who strengthens my body at this time. You give riches in food in wars and give money to our sons, etc. (15)