हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.46.18

मंडल 8 → सूक्त 46 → श्लोक 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
ये पा॒तय॑न्ते॒ अज्म॑भिर्गिरी॒णां स्नुभि॑रेषाम् । य॒ज्ञं म॑हि॒ष्वणी॑नां सु॒म्नं तु॑वि॒ष्वणी॑नां॒ प्राध्व॒रे ॥ (१८)
जो मरुद्गण बादलों के बहने वाले एवं शक्तिकारक जलों के साथ गिरते हैं, उन्हीं महान्‌ ध्वनि वाले मरुतों के निमित्त हम यज्ञ करेंगे एवं उनके द्वारा दिया हुआ सुख पावेंगे. (१८)
The deserts who fall with the flowing and powerful waters of the clouds, we will perform yajna for the same great-sounding maruts and get the happiness given by them. (18)