हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.46.2

मंडल 8 → सूक्त 46 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
त्वां हि स॒त्यम॑द्रिवो वि॒द्म दा॒तार॑मि॒षाम् । वि॒द्म दा॒तारं॑ रयी॒णाम् ॥ (२)
हे वज्रधारी इंद्र! यह बात सत्य है कि हम तुम्हें अन्नों एवं धनों का दाता जानते हैं. (२)
O thunderbolt Indra! It is true that we know you the giver of food and wealth. (2)