हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.46.4

मंडल 8 → सूक्त 46 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
सु॒नी॒थो घा॒ स मर्त्यो॒ यं म॒रुतो॒ यम॑र्य॒मा । मि॒त्रः पान्त्य॒द्रुहः॑ ॥ (४)
वही मनुष्य यज्ञसंपन्न होता है, जिसकी रक्षा द्रोहरहित मरुद्गण, अर्यमा एवं मित्र करते हैं. (४)
The same man is the yajna-sampan, who is protected by the deserts, the aryans and the friends without hatred. (4)