ऋग्वेद (मंडल 8)
व्य१॒॑स्मे अधि॒ शर्म॒ तत्प॒क्षा वयो॒ न य॑न्तन । विश्वा॑नि विश्ववेदसो वरू॒थ्या॑ मनामहेऽने॒हसो॑ व ऊ॒तयः॑ सुऊ॒तयो॑ व ऊ॒तयः॑ ॥ (३)
हे आदित्यो! तुम्हारे पास पक्षियों के पंखों के समान जो सुख है, वह हमें दो. हे सब धन के स्वामी आदित्यो! हम तुमसे घर के उपयुक्त सभी संपत्तियां मांगते हैं. तुम्हारी रक्षा उपद्रवरहित एवं शोभन है. (३)
Hey Aditya! Give us the happiness that you have like the wings of birds. O Aditya, lord of all wealth! We ask you for all the suitable property of the house. Your defense is hassle-free and adorning. (3)