ऋग्वेद (मंडल 8)
क॒दा वां॑ तौ॒ग्र्यो वि॑धत्समु॒द्रे ज॑हि॒तो न॑रा । यद्वां॒ रथो॒ विभि॒ष्पता॑त् ॥ (२२)
हे नेता अश्चिनीकुमारो! समुद्र में फेंके हुए तुग्रपुत्र भुज्यु ने स्तुति द्वारा तुम्हें न जाने कब बुलाया था? इसीसे अश्वों सहित तुम्हारा रथ वहां पहुंच गया. (२२)
O leader Aschinikumaro! When did Bhuju, the son of Tugrah, who was thrown into the sea, call you not to know by praise? That's why your chariot with horses reached there. (22)