हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.5.26

मंडल 8 → सूक्त 5 → श्लोक 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 5
यथो॒त कृत्व्ये॒ धनें॒ऽशुं गोष्व॒गस्त्य॑म् । यथा॒ वाजे॑षु॒ सोभ॑रिम् ॥ (२६)
हे अश्विनीकुमारो! तुमने जिस प्रकार अंक्षु के धन, अगस्त्य की गायों और सौभरि के अन्न की रक्षा की थी, उसी प्रकार हमारी रक्षा करो. (२६)
O Ashwinikumaro! Protect us in the same way that you protected Ankshu's wealth, Agastya's cows and Saubhri's grain. (26)