ऋग्वेद (मंडल 8)
आ नो॑ द्यु॒म्नैरा श्रवो॑भि॒रा रा॒या या॑तमश्विना । पुरु॑श्चन्द्रा॒ नास॑त्या ॥ (३२)
हे बहुतों के मित्र अश्विनीकुमारो! तुम हमारे पास अन्न, यश और धन लेकर आओ. (३२)
O friend of many, Ashwinikumaro! Bring us food, fame and wealth. (32)
मंडल 8 → सूक्त 5 → श्लोक 32 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation