हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.5.35

मंडल 8 → सूक्त 5 → श्लोक 35 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 5
हि॒र॒ण्यये॑न॒ रथे॑न द्र॒वत्पा॑णिभि॒रश्वैः॑ । धीज॑वना॒ नास॑त्या ॥ (३५)
हे मन के समान तेज चलने वाले अश्चिनीकुमारो! आगे पैर बढ़ाने वाले घोड़ों से युक्त, स्वर्णनिर्मित रथ द्वारा हमारे पास आओ. (३५)
O ashchinikumaro who walks as fast as the mind! Come to us by a golden-made chariot, consisting of horses that raise their legs forward. (35)