हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.5.4

मंडल 8 → सूक्त 5 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 5
पु॒रु॒प्रि॒या ण॑ ऊ॒तये॑ पुरुम॒न्द्रा पु॑रू॒वसू॑ । स्तु॒षे कण्वा॑सो अ॒श्विना॑ ॥ (४)
हे बहुतों के प्रिय, बहुतों को आनंद देने वाले एवं बहुत धन वाले अश्चिनीकुमारो! हम कण्वगोत्रीय ऋषि अपनी रक्षा के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (४)
O dear to many, aschinikumaro, who gives joy to many and has great wealth! We, the Sages of Kanvagotriya, praise you for your protection. (4)