हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.50.7

मंडल 8 → सूक्त 50 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
त्वं ह्येहि॒ चेर॑वे वि॒दा भगं॒ वसु॑त्तये । उद्वा॑वृषस्व मघव॒न्गवि॑ष्टय॒ उदि॒न्द्राश्व॑मिष्टये ॥ (७)
हे इंद्र! तुम आओ और धनदान के लिए हमें भोग के योग्य धन दो. हे धनस्वामी इंद्र! मुझ गाय चाहने वाले को गाय दो और अश्च चाहने वाले को अश्व दो. (७)
O Indra! You come and give us money worthy of enjoyment for money. O Dhanswami Indra! Give a cow to the one who wants me a cow and give a horse to the one who wants the horse. (7)