हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.55.9

मंडल 8 → सूक्त 55 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
कदू॒ न्व१॒॑स्याकृ॑त॒मिन्द्र॑स्यास्ति॒ पौंस्य॑म् । केनो॒ नु कं॒ श्रोम॑तेन॒ न शु॑श्रुवे ज॒नुषः॒ परि॑ वृत्र॒हा ॥ (९)
ऐसा कौन सा पुरुषार्थ है जो इंद्र ने न किया हो? किस सुनने योग्य पुरुषार्थ के साथ इंद्र नहीं सुने जाते? इंद्र की वृत्रवध वाली घटना उनके जन्म से ही सुनी जा रही है. (९)
What is the purushartha that Indra has not done? With which hearingable purushartha is Indra not heard? Indra's incident of death is being heard since his birth. (9)