ऋग्वेद (मंडल 8)
त्यान्नु क्ष॒त्रिया॒ँ अव॑ आदि॒त्यान्या॑चिषामहे । सु॒मृ॒ळी॒काँ अ॒भिष्ट॑ये ॥ (१)
हम अभिलषित धन पाने के लिए क्षत्रिय जाति वाले एवं भली प्रकार सुखदाता आदित्यों से रक्षा की याचना करते हैं. (१)
We beg for protection from the Kshatriya jati and well-wishing Adityas to get the money that is wanted. (1)