ऋग्वेद (मंडल 8)
अपो॒ षु ण॑ इ॒यं शरु॒रादि॑त्या॒ अप॑ दुर्म॒तिः । अ॒स्मदे॒त्वज॑घ्नुषी ॥ (१५)
हे आदित्यो! यह जाल एवं दुर्बुद्धि हमारी हिंसा न करके हमसे दूर जाए. (१५)
Hey Aditya! Let this trap and evil go away from us by not doing our violence. (15)
मंडल 8 → सूक्त 56 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation