हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.57.6

मंडल 8 → सूक्त 57 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 57
प॒रोमा॑त्र॒मृची॑षम॒मिन्द्र॑मु॒ग्रं सु॒राध॑सम् । ईशा॑नं चि॒द्वसू॑नाम् ॥ (६)
मैं असीमित शरीर वाले, स्तुति के अनुरूप रूपधारी, उग्र, शोभनधन से युक्त एवं संपत्तियों के स्वामी इंद्र को बुलाता हूं. (६)
I call Indra, with an unlimited body, shaped in line with praise, fierce, adorned with adornment and the lord of the properties. (6)