हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.58.4

मंडल 8 → सूक्त 58 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 58
अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे । सू॒नुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम् ॥ (४)
गायों के पालक, यज्ञ के पुत्र एवं साधुओं का पालन करने वाले इंद्र की स्तुति उसी प्रकार करो, जिस प्रकार वे यज्ञ के प्रति जाने का रास्ता जान सकें. (४)
Praise Indra, the guardian of the cows, the son of the yajna and the one who follows the sadhus, in the same way that they know the way to go towards the yajna. (4)