हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.58.7

मंडल 8 → सूक्त 58 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 58
उद्यद्ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टपं॑ गृ॒हमिन्द्र॑श्च॒ गन्व॑हि । मध्वः॑ पी॒त्वा स॑चेवहि॒ त्रिः स॒प्त सख्युः॑ प॒दे ॥ (७)
मैं एवं इंद्र जिस समय सूर्य के निवासस्थान में जाते हैं, उस समय मधुर सोमरस पीकर सबके सखा आदित्य के इक्कीस स्थानों में हम एकत्रित हों. (७)
When Indra and I go to the abode of the Sun, we should drink sweet somersas and gather in twenty-one places of Aditya, everyone's friend. (7)