हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.6.13

मंडल 8 → सूक्त 6 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 6
यदस्य मन्युरध्वनीद्वि वृत्रं पर्वशो रुजन्‌. अपः समुद्रमैरयत्‌.. (१३)
इंद्र के क्रोध ने जिस समय वृत्र को टुकड़ेटुकड़े करके काटते हुए ध्वनि की थी, उस समय जल को सागर की ओर भेजा था. (१३)
Indra's anger had sent water to the sea at the time when he made a sound of the vritra being cut into pieces. (13)