हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.6.29

मंडल 8 → सूक्त 6 → श्लोक 29 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 6
अतः समुद्रमुद्वतश्चिकित्वाँ अव पश्यति. यतो विपान एजति.. (२९)
जो व्यापक इंद्र सूर्यरूप में संसार में विहार करते हैं, वे ही ऊपर के लोक में स्थित रहकर नीचे की ओर मुंह करके सागर को देखते हैं. (२९)
The broad Indras who visit the world in the form of the sun, they are the ones who are located in the upper realm and look at the ocean facing downwards. (29)