हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.6.4

मंडल 8 → सूक्त 6 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 6
समस्य मन्यवे विशो विश्वा नमन्त कृष्टयः. समुद्रायेव सिन्धवः. (४)
इंद्र के क्रोध से भयभीत होकर सभी प्रजाएं इंद्र को इस प्रकार प्रणाम करती हैं, जिस प्रकार नदियां सागर के सामने झुकती हैं. (४)
Fearing Indra's anger, all the people worship Indra in this way, just as the rivers bow down before the ocean. (4)