हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.6.43

मंडल 8 → सूक्त 6 → श्लोक 43 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 6
इमां सु पूर्व्यां धियं मधोर्घृतस्य पिप्युषीम्‌. कण्वा उक्थेन वावृधुः.. (४३)
कण्वगोत्रीय ऋषि उक्थ मंत्रों द्वारा पूर्वजों का मधुर जल बढ़ाने वाला यज्ञकर्म उन्नत करें. (४३)
Improve the yajnakarma of the ancestors that enhance the sweet water by the Kanvagotriya sage uktha mantras. (43)