हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.60.6

मंडल 8 → सूक्त 60 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
त्वं र॒यिं पु॑रु॒वीर॒मग्ने॑ दा॒शुषे॒ मर्ता॑य । प्र णो॑ नय॒ वस्यो॒ अच्छ॑ ॥ (६)
हे अग्नि! तुम हव्य देने वाले मनुष्य को अनेक वीर पुत्रों से युक्त धन देते हो, इसलिए हमें भी निवासस्थान देने योग्य धन दो. (६)
O agni! You give money to the man who gives the havya with many brave sons, so give us the money to be given the dwelling place. (6)