हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.61.1

मंडल 8 → सूक्त 61 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 61
ह॒विष्कृ॑णुध्व॒मा ग॑मदध्व॒र्युर्व॑नते॒ पुनः॑ । वि॒द्वाँ अ॑स्य प्र॒शास॑नम् ॥ (१)
हे अध्वर्युगण! अग्नि आए हैं. तुम उन्हें शीघ्र हव्य दो. हव्य देना जानने वाले अध्वर्यु यज्ञ की पुनः सेवा करते हैं. (१)
O teacher! The agni has come. You give them a quick note. Those who know how to give a greeting serve the adhwaryu yajna again. (1)