हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.63.12

मंडल 8 → सूक्त 63 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 63
यं त्वा॒ जना॑स॒ ईळ॑ते स॒बाधो॒ वाज॑सातये । स बो॑धि वृत्र॒तूर्ये॑ ॥ (१२)
हे अग्नि! दुःखी लोग अन्न एवं धन पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम युद्ध में जागो. (१२)
O agni! Unhappy people praise you to get food and wealth. Wake up in war. (12)