ऋग्वेद (मंडल 8)
स॒त्यमित्त्वा॑ महेनदि॒ परु॒ष्ण्यव॑ देदिशम् । नेमा॑पो अश्व॒दात॑रः॒ शवि॑ष्ठादस्ति॒ मर्त्यः॑ ॥ (१५)
हे महती परुष्णी नदी एवं महान् जल! मैं तुमसे सच्ची बात कहता हूं. इस शक्तिशाली राजा श्रुतर्वा की अपेक्षा कोई भी मनुष्य अधिक घड़े नहीं दे सकता है. (१५)
O great parushni river and great water! I'm telling you the truth. No man can give more pitchers than this mighty king Shruterva. (15)