हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.63.2

मंडल 8 → सूक्त 63 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 63
यं जना॑सो ह॒विष्म॑न्तो मि॒त्रं न स॒र्पिरा॑सुतिम् । प्र॒शंस॑न्ति॒ प्रश॑स्तिभिः ॥ (२)
लोग हव्य धारण करके एवं घी का हवन करते हुए अग्नि की स्तुति सूर्य के समान करते हैं. (२)
People praise agni like the sun by wearing a havan and performing a havan of ghee. (2)