हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.63.7

मंडल 8 → सूक्त 63 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 63
इ॒यं ते॒ नव्य॑सी म॒तिरग्ने॒ अधा॑य्य॒स्मदा । मन्द्र॒ सुजा॑त॒ सुक्र॒तोऽमू॑र॒ दस्माति॑थे ॥ (७)
प्रसन्न, शोभन-जन्म वाले, शोभन-यज्ञ वाले, बुद्धिमान्‌, दर्शनीय एवं अतिथि के समान पूज्य अग्नि! मैं तुम्हें नवीन स्तुति अर्पित करता हूं. (७)
Happy, shobhan-born, shobhan-yajna-yaagya, wise, visible and a guest-like worshipable agni! I offer you new praise. (7)