हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.64.3

मंडल 8 → सूक्त 64 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
त्वं ह॒ यद्य॑विष्ठ्य॒ सह॑सः सूनवाहुत । ऋ॒तावा॑ य॒ज्ञियो॒ भुवः॑ ॥ (३)
हे अतिशय युवा, बल के पुत्र एवं सब ओर से बुलाए गए अग्नि! तुम सत्ययुक्त एवं यज्ञ के योग्य हो. (३)
O ye of the most young, the son of strength, and the agni called from all sides! You are truthful and worthy of yajna. (3)